कुष्ठ रोग क्या हैं ? [What is the Leprosy?]

कुष्ठ रोग [Leprosy] मानव जाति में पाया जाने वाला सदियों पुराना रोग है एक समय था जब इस रोग का सही कारण मालूम ना होने के कारण लोग  Leprosy रोग  को देवी का प्रकोप या पैतृक रोग अथवा पूर्व जन्म के बुरे कर्मों का फल मानते थे क्योंकि उस समय यह रोग लाइलाज था अतः रोग  बढ़ता ही जाता था |  फलस्वरुप हाथ- पैरों की Fingers  टेढ़ी हो जाती थी उनमे घाव  हो जाते थे तरह चेहरे और शरीर के अन्य गांठे  निकल आती थी जिससे विरूपता व विकलांगता पैदा होती थी इसी के कारण लोग Leprosy रोग  से घृणा करते थे या उन्हें घर व समाज से निकाल दिया जाता था इस प्रकार यह रोगी बेसहारा हो जाते थे और भीख मांग कर पेट भरने के अलावा इनके पास कोई चारा नहीं होता था।

KTNEWSLIVE

रोग का कारण[The cause of the disease]-

आज वैज्ञानिक खोजो ने यह सिद्ध कर दिया है कि  Leprosy रोग  भी अन्य रोगो  की भांति एक विशिष्ट प्रकार के जीवाणुओं से होता है ना तो यह  देवी प्रकोप है ना पूर्व जन्मों का फल और ना ही पैतृक रोग है रोग के जीवाणु संक्रमण कुष्ठरोगी के नाक की छीक में पाए जाते हैं जहां से वह वायुमंडल में आ जाते हैं फिर स्वाँस  के जरिए एक दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करते हैं यह  सच है कि यह रोग  छुआछूत का रोग है परंतु अन्य छूत के  रोग  जैसे टी.बी से अपेक्षाकृत कम छूत का रोग हैं इसलिए Leprosy रोग को छूने मात्र  से यह रोग  दूसरे को नहीं लग जाता|  कुष्ठ रोग के साथ लंबे समय तक नजदीकी संबंध रहने पर यह रोग  केवल उन लोगों को ही होता है जिनमें कुछ निरोधक क्षमता तो होती ही नहीं है अथवा कम होती है।

 

कुष्ठ रोग के प्रकार[Type-of-Leprosy]-

[A]-असंक्रामक रोगी[Non-infectious patient]-

एक अनुमान के अनुसार इस समय पूरे संसार में लगभग 12000000 कुष्ठ रोगी हैं जिसके एक तिहाई यानी 4000000 रोगी अकेले भारत में ही निवास करते हैं यह  संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है क्योंकि बहुत से रोगी सामाजिक बहिष्कार के डर से  अथवा जानकारी ना होने के कारण, उनमें Leprosy रोग  होते हुए भी डॉक्टर को नहीं दिखाते और ना ही अस्पताल में इलाज करवाते हैं इस रोग  का एक खुसद पहलू यह है कि कुष्ठ रोग के 80% रोगी संक्रामक नहीं होते|  अतः वे रोग  को समाज  में नहीं फैला सकते|  इन में रोग  की शुरुआत शरीर पर सुन्न चकत्ते या दाग से होती है बहुत  लोग ऐसे कुष्ठ रोगियों जिनकी अंगुलियां टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती  हैं या हाथ पैरों में घाव हो जाते हैं एवं रोग लग जाने के भय से  उनके नजदीक जाने से भी कतराते हैं जबकि सच्चाई यह है कि ऐसे रोगी प्रायः  असंक्रामक होते हैं और रोग  पैदा ही नहीं सकते|

ये भी पढ़े :-डायबिटीज के उपचार आहार व्यवस्था एवं सावधानियां

[B] संक्रामक रोगी [Infectious patient]-

केवल 20% कुष्ठ रोगी ही ऐसे होते हैं जो संक्रामक होते हैं और समाज में रोग  को फैलाते हैं इस प्रकार के रोगियों में ना तो कोई विरूपता होती है और ना ही कोई विकलांगता ऐसे रोगियों का चेहरा कुछ लालसा होता है तथा खाल  चिकनी व चमकदार होती है आंखों की भौहे झड़  जाती हैं और कान कुछ मोटे हो जाते हैं देखने में यह कुष्ठरोगी समान लोगों की तरह ही दिखाई देते हैं इसलिए लोग इन्हें पहचान नहीं पाते हैं और वह हमेशा बीच में रहकर कुष्ठरोग फैलाते हैं वास्तव में ऐसे रोगियों की पहचान कर उनका शीघ्र इलाज करने की आवश्यकता होती है ताकि रोग को समाज में फैलाने से रोका जा सके

इस रोग का अच्छा पहलू यह है कि ज्यादातर लोगों में कुष्ठ रोग से बचाव की आत्म क्षमता होती है यदि ऐसा ना हो तो पूरे संसार में कुष्ठ रोग ,महामारी के रूप में दिखाई देता | यह रोग  पुरुषों और स्त्रियों वह अमीर गरीब बच्चों व बूढ़ों सभी को हो सकता है कुष्ठ रोग का प्रकार व गंभीरता रोगी की रोग निरोधक क्षमता पर निर्भर करती है यदि रोगी में निरोधक क्षमता अपेक्षाकृत अधिक होती है तो रोग  सीमित रहता है| यह शरीर पर दो या तीन सुन्न चकत्ते  ही निकलते हैं ऐसा रोगी असंक्रामक होता है यानी वह रोग  नहीं फैला सकता है परंतु यदि इसके विपरीत निरोधक क्षमता बहुत कम हुई तो रोग पूरे शरीर में फैल सकता है इनमें शरीर पर चकत्तों  की संख्या काफी होती है नाक  व कान सूजे हुए दिखाई देते हैं तथा चेहरे व बदन पर छोटी छोटी गाँठ सी  निकल आती हैं ये  रोगी बहुत अधिक संक्रामक होते हैं।

 

कुष्ठ रोग की शुरुआत और प्रसार[Leprosy Start and spread]-

प्रायः  कुष्ठ रोग की शुरुआत शरीर पर चकत्ते या दाग  से होती है जो सुन्न  होता है यदि इस प्रारंभिक अवस्था में ही इसका इलाज करा लिया जाए तो रोगी पूरी तरह ठीक हो जाता है और उसमें वह विरूपता व विकलांगता पैदा नहीं होने पाती  जो सामाजिक बहिष्कार का मुख्य कारण है यदि रोग की  सही जानकारी ना होने अथवा लापरवाही के कारण  इलाज ना कराया जाए तो रोग  बढ़ता ही जाता है अंगुलियों टेढ़ी हो जाती है हाथ-पैरों में घाव हो जाते हैं व चेहरे पर दाग लगने लगता है ज्यादातर लोग इसी अवस्था में Doctor की सलाह लेने पहुंचते हैं यद्यपि इस अवस्था में भी रोग का इलाज संभव है परन्तु इलाज में देरी हो जाने के कारण जो विकलांगता और विरूपता आ चुकी होती है उसे दवा के जरिए दूर करके फिर पहले जैसी स्थिति नहीं लाई जा सकती | हां ऑपरेशन करके आप को इस प्रकार बनाया जा सकता है कि रोगी फिर  से काम धंधा करने के लायक बन सके और  वह अपनी जीविका चला सके।

ये भी पढ़े :-मोटापा होने का कारण [The reason for obesity]

इलाज[Treatment]-

कुछ सालों पहले तक कुष्ठ रोग का इलाज काफी लंबा होता था किंतु उसकी केवल एक ही दवा थी जिसे सालो तक लेना पड़ता था परंतु अब ऐसी नई नई दवाइयां आ गई हैं जिनके 6 महीने से 2 साल तक लगातार लेने से कुष्ठ रोग  पूरी तरह ठीक हो जाता है असंक्रामक कुष्ठ रोगी को केवल 6 माह तक तथा संक्रामक रोगों को केवल 2 साल तक दवा लेनी पड़ती है कुष्ठरोग के मुफ्त इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों तथा कुष्ठ केंद्रों पर उपलब्ध है।

संक्रामक कुष्ठ रोगी को नई दवाइयों की सहायता से 2 सप्ताह के अंदर असंक्रामक बना दिया जाता है फिर वे  समाज में रहते हुए भी रोग  को नहीं फैला सकते हैं |  परंतु पूरी तरह से निरोग बनने के लिए इन संक्रामक रोगियों को 2 साल तक लगातार इलाज किया जाता है पहले की तरह अन्य कुछ कुष्ठ रोगी को घर के बाहर निकलने की आवश्यकता नहीं है बल्कि एक कुष्ठरोगी को घर परिवार के साथ रखकर हीं इलाज किया जा सकता है|

कुष्ठ रोग का टीका-

छूत  के अन्य रोगो  की तरह अभी इस रोग का कोई टीका  उपलब्ध नहीं है जिसे  लगातार रोग से हमेशा के लिए बचा जा सके अतः रोग  को शुरू की अवस्था में पहचान कर उसका लगातार इलाज करवाना ही इस रोग से पूरी तरह मुक्त होने, विरूपता और विकलांगता से बचने तथा समाज में इस रोग को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय है।

याद रखें-

शरीर पर कोई सुन्न  दाग या चकत्ता  कुष्ठ रोग की शुरुआत हो सकता है तुरंत डॉक्टर से सलाह जरूरी है

कुष्ठ रोग का यदि  शुरू से इलाज कर दिया जाए तो रोग  पूरी तरह ठीक हो जाता है और अंगों में विकृति भी नहीं आती।

अब इस रोग का इलाज मात्र 6 माह से 2 साल की अवधि में ही पूरा हो जाता है।

अब कुष्ठ रोगी  का इलाज घर पर ही रखकर किया जा सकता है।

कुष्ठ रोगी को समाज  की दया नहीं सहयोग की जरूरत होती है।

*चिकित्सक के परामर्श के बिना उपरोक्त औषधियों का सेवन ना करें।

ये भी पढ़े :-डायबिटीज के प्रकार[Type Of Diabetes]

ये भी पढ़े :-डायबिटीज “मधुमेह” की हिस्ट्री [History of Diabetes]

ये भी पढ़े :- दिल की बीमारियां[Diseases of the Heart]

13Shares
http://health.ktnewslive.com/wp-content/uploads/2018/03/19136930_303.jpghttp://health.ktnewslive.com/wp-content/uploads/2018/03/19136930_303-150x150.jpgAdminHealth TipsLeprosyकुष्ठ रोग क्या हैं ? कुष्ठ रोग  मानव जाति में पाया जाने वाला सदियों पुराना रोग है एक समय था जब इस रोग का सही कारण मालूम ना होने के कारण लोग  Leprosy रोग  को देवी का प्रकोप या पैतृक रोग अथवा पूर्व जन्म के बुरे कर्मों का फल मानते थे क्योंकि उस...ktnl