कारण- मस्तिष्क के आंतरिक भाग में रक्त स्राव का होना या मस्तिष्क में किसी प्रकार की रुकावट होने के कारण मस्तिष्क की ओर रक्त परिभ्रमण में रुकावट पैदा हो जाती है जिसके कारण प्रभावित केंद्रीय मस्तिष्क संस्थान से संबंधित शरीर के दाएं या बाएं भाग की गतिविधियां व संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है ऐसी अवस्था को फालिज कहते हैं चेहरे या मुंह स्नायु शाखाओं पर दर्द या हवा का असर हो जाने के कारण मुंह के प्रभावित भाग में टेढ़ापन आ जाता है ऐसे विकार को लकवा कहते हैं शुरू में थकान महसूस होती है और फिर एक हाथ राशा के कारण कंपकपाने लगता है और फिर यह राशा दूसरे हाथ में भी हो जाता है यह बीमारी अधिकतर वृद्ध तथा कमजोर लोगों में पैदा होती है जिन लोगों में निम्नलिखित दवाइयां अत्यंत उपयोगी है।

हब्बे अजराकी- फालिज, लकवा, स्नायु दर्द में लाभदायक है तथा स्नायु को शक्ति प्रदान करता है।

सेवन विधि- एक से दो गोली सुबह शाम पानी से सेवन करें।

दव- उल-मिस्क हार जवाहरवाली- दिल व जिगर तथा दिमाग को लाभ देती है उलझन तथा मालीखोलिया मैं लाभदायक होती है।

सेवन विधि- सुबह 5 ग्राम अर्क गावजबान 125 मिली के साथ सेवन करें।

दवा-उल-मिस्क हार सादा- स्नायु तथा बलगमी बीमारियों जैसे फालिज, लकवा और राशा मे लाभदायक है।

सेवन विधि- 5 ग्राम अर्क गावजबान 125 मिली के साथ सेवन करें।

माजून अजराकी- स्नायु संस्थान को उत्तेजित करने के गुण के कारण यह औषधि फालिज, लकवा और राशा में लाभदायक है।

सेवन विधि- 3 से 5 ग्राम सुबह नाश्ते के पश्चात या सुबह श्याम खाना खाने के पश्चात पानी से सेवन करें।

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जोगराज गोगुल- फालिज लकवा राशा और स्नायु संबंधित मस्तिष्क रोगो मैं लाभदायक है स्नायु संस्थान को प्रभावित करने के अतिरिक्त आतशक और जोड़ के दर्द में लाभदायक है।

सेवन विधि- 5 ग्राम सुबह-शाम ताजे पानी से सेवन करें।

माजून चोबचीनी वा नुस्खा खास- फालिज लकवा आतशक और बलगमी तथा सौदावी बीमारियों मैं लाभदायक होने के अतिरिक्त अमाशय को गुर्दा तथा बस्ति को भी शक्ति देता है यौवन शक्ति तथा स्नायु शक्तिवर्धक भी है शुद्ध खून भी पैदा करता है।

सेवन विधि- 5 ग्राम सुबह शाम ताजे पानी से सेवन करें।

माजून सीर अलवी खानी- सर्दियों के मौसम में इस माजून का उपयोग बलगम तथा सौदा से उत्पन्न होने वाली बीमारियों से रक्षा करता है इसके अतिरिक्त वह माजून फालिज, लकवा और गठिया में भी लाभदायक है।

सेवन विधि- 5 ग्राम सुबह या रात को पानी से सेवन करें।

माजून लना- लंबा राशा और आतशक मैं लाभदायक है जोड़ों के दर्द को भी लाभ पहुंचाता है।

सेवन विधि- 5 ग्राम सुबह या शाम पानी से ले।

नोट– उपरोक्त वर्णित औषधीय के अतिरिक्त खमीरा गावजबान ,अम्बरी जवाहर वाला ,माजून तल्ख भी लाभदायक है तथा रोगन सुर्ख और रोगन सूरजान भी स्थानीय तौर पर उपयोगी किए जा सकते हैं।

*चिकित्सक के परामर्श के बिना उपरोक्त औषधियों का सेवन ना करें।

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