डायबिटीज “मधुमेह”[Diabetes]

हम बात कर रहे हैं डायबिटीज की हिस्ट्री के बारे में आखिर कहां से आई है भारत में डायबिटीज प्राचीन काल से ज्ञात रोग है भारतीय यूनानी तथा रोग की पुरानी चिकित्सा संबंधित पुस्तकों में इसके वर्णन उपलब्ध है लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व चरक और सुश्रुत ने इसके मधुमेह की संज्ञा दी है उच्च रक्तचाप की ही तरह डायबिटीज भी एक बार  प्रकट होने के बाद जीवन भर का साथी बन जाता है।

डायबिटीज रोग क्या है इसकी व्यापकता कितनी है इसके कारण क्या है उपेक्षा बरतने से क्या हानिकारक संभावनाएं रहती हैं समय रहते इसका किस तरह उपचार किया जा सकता है जिनमें इस रोग  की संभावना पहले से विद्वान हो वह किस तरह इसके निवारण का प्रयास कर सकते हैं उपचार व्यवस्था में रोगी को किन दायित्व का निर्वाह करना जरूरी होता है|

डायबिटीज क्या है?–

शरीर की तंत्र कोशिकाओं को अपना कार्य कर पाने के लिए शक्ति रक्त में मौजूद ग्लूकोज से मिलती है। सामान्य स्वस्थ इंसान के रक्त में ग्लूकोज की मात्रा एक निर्धारित सीमा के भीतर रहती है निराहार स्थिति में प्रति 100 मिलीलीटर रक्त में 80 से 120 मिलीग्राम और खाने के बाद 100 मिलीलीटर में अधिकतम 180 मिलीग्राम इससे अधिक पर ग्लूकोज मूत्र में निकलने लगता है। रक्त में ग्लूकोज की असामान्य अधिक तादात की स्थिति को हाईपरग्लाईसिमिया और मूंत्र में निकलने को ग्लाइकोसूरिया कहते हैं।

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शरीर में ग्लूकोस के समुचित उपयोग के लिए इंसुलिन एक विशेष हार्मोन अनिवार्य है जब किसी कारणवश शरीर में इंसुलिन का अभाव हो जाता है अथवा तंत्र कोशिकाओं पर इंसुलिन का वांछित प्रभाव नहीं हो पाता तब शरीर में हाईपरग्लाईसीमिया और ग्लाईकोसूरिया की जो स्थिति बनती है उसे डायबिटीज कहते हैं।

डायबिटीज होने के कारण–

डायबिटीज अपने आप में एक सुनिश्चित रोग नहीं है वास्तव में यह एक लक्षण हैं जो कई विभिन्न कारणों से बन सकता है जैसा कि पहले कहा जा चुका है तंत्र कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज के इस्तेमाल हो पाने के लिए इंसुलिन अनिवार्य है यह  उदर की पिछली दीवार में स्थित 15 सेंटीमीटर आकार की एक मत्स्याकार ग्रंथि  में बनती है। जब किसी कारणवश इन कोशिकाओं की क्षति हो जाती है तब इन में  इंसुलिन नहीं बन पाती रक्त में इंसुलिन की कमी हो जाती है ऐसा कई कारणों से हो सकता है इन कारणों में ” मंप्स  वायरस ” “का़क्सेकी ” B-4 वायरस विषाक्त रासायनिक पदार्थ हानिकारक साइटोंटॉक्सिन तथा कुछ प्रतिकारक पदार्थ ( एंटीबॉडी) प्रमुख है।

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एक दूसरी स्थिति होती है जब शरीर में इंसुलिन तो बनती है पर कुछ दशाओं में कारण  तंत्र कोशिकाओं पर उसका वांछित प्रभाव नहीं पड़ता इस स्थिति का सर्वाधिक व्यापक कारण मोटापा होता है जीवन में श्रम का अभाव और जिगर के लोग भी इसका कारण बन सकते हैं।

अगर माता-पिता दोनों को डायबिटीज हो तो उनकी सभी संतानों में डायबिटीज होने की संभावना रहती है अगर मां-बाप में से किसी एक को डायबिटीज हो और दूसरे पक्ष के माता-पिता सगे भाई बहन अथवा चचेरे भाई बहन में से किसी एक को यह रोग हो तो संतानों में तदनुसार संभावना रहती है। जिन समुदायों में सगोत्र विवाह नहीं होते उनमें यह संभावना कम होती है दक्षिण भारत के विभिन्न समुदायों में परिवारिक रिश्तो में व्यवहारिक संबंध होते हैं उनमें  यह रोग अधिक पाया जाता है।आगे पढ़े :-डायबिटीज के प्रकार[Type Of Diabetes]

*चिकित्सक के परामर्श के बिना उपरोक्त औषधियों का सेवन ना करें।

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